David Reimer: एक्सपेरिमेंट के नाम पर बर्बाद हो गई लड़के की जिंदगी, साइंटिस्ट्स ने बॉडी के साथ किया बड़ा खिलवाड़

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डॉक्टर्स (Doctors) को भगवान का रूप माना जाता है लेकिन कनाडा (Canada) के डेविड रैमेर (David Reimer) के केस में ऐसा नहीं था. डेविड के साथ एक डॉक्टर ने जो किया, उसे जान कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं.

दरअसल, 22 अगस्त 1965 को जेनेट और रोनाल्ड रैमेर (Janet and Ronald Reimer) के घर पर पैदा हुए डेविड का जन्म तो लड़के के रूप में हुआ था लेकिन पूरी जिंदगी उसे लड़की बनकर रहना पड़ा. आपको बता दें कि डेविड, जिनका जन्म के बाद नाम ब्रूस (Bruce) रखा गया था, उनका एक जुड़वा भाई भी था. जिसका नाम ब्रियान (Brian) था. आपको बता दें कि जन्म के बाद डॉक्टर्स ने माता-पिता को जानकारी दी कि दोनों बच्चें फिमोसिस (Phimosis) पीड़ित हैं. जानकारी के लिए बता दें कि इस बीमारी की वजह से लड़कों के प्राइवेट पार्ट (Private Part) की ऊपर की स्किन (Foreskin) पीछे की तरफ खिच नहीं पाती और उन्हें यूरिनेशन (Urination) के दौरान तकलीफ महसूस होती है.

सफल नहीं हो पाया ब्रूस का ऑपरेशन

जानकारी के मुताबिक कुछ ही महीने में डॉक्टर्स ने बच्चों का ऑपरेशन (Operation) करने का फैसला लिया. उन्होंने सबसे पहले ब्रूस का ऑपरेशन किया, जो कि नाकामयाब रहा. आपको बता दें कि ब्रूस का प्राइवेट पार्ट सर्जरी के दौरान जल गया, जिसके बाद उसे कभी ठीक नहीं किया जा सका. ब्रूस की हालत देखने के बाद उसके भाई की सर्जरी नहीं की गई लेकिन बाद में अपने आप ही ब्रूस यानी डेविड की बिमारी ठीक हो गई.

डेविड का क्या हुआ?

साल 1967 में ब्रूस के मां-बाप ने साइकियोलॉजिस्ट्स एंड सेक्सोलोगिस्ट (Psychologist and Sexologist) डॉ. जॉन मनी (Dr John Money) से कंसल्ट (Consult) किया. जिसके बाद ब्रूस का सेक्स चेंज (Sex change or gender reassignment) कर उन्हें लड़की बना दिया गया. डॉक्टर्स ने उनके असल प्राइवेट पार्ट को पूरी तरह से हटा कर उसकी जगह लड़कियों के प्राइवेट पार्ट्स जैसे ही प्राइवेट पार्ट बनाए गए. जिसके बाद उनका नाम ब्रेंडा (Brenda) रखा गया. आपको बता दें कि असल में एक लड़का होते हुए भी उन्हें कई सालों तक उनकी असलियत नहीं बताई गई.

बच्चे पर होते रहे शोध

ब्रूस से ब्रेंडा बना बच्चा कनाडा के डॉक्टर्स के लिए रिसर्च के लिए एक गिनी पिग (Guinea Pig) बनकर रह गया था. बताया जाता है कि बाल्टिमोर (Baltimore) के जॉन हॉपकिंस हॉस्पिटल (Johns Hopkins Hospital) के डॉक्टर जॉन मनी (John Money) ने ब्रूस को अपने शोध के लिए इस्तेमाल किया. आपको बता दें कि इस केस को जोन/जॉन केस (John/Joan case) का नाम दिया गया. यही नहीं, ब्रूस से मिली जानकारी के मुताबिक डॉक्टर ब्रूस और उनके भाई को शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहते और एक दूसरे के प्राइवेट पार्ट्स छूने के लिए भी मजबूर करते थे. साथ ही उनसे जबरदस्ती कराए गए सेक्शुअल एक्ट्स (Sexual Acts) की कई बार तस्वीर भी खींचते, कभी उनसे अकेले में ऐसा कराते तो कभी उन्हें 5-6 और डॉक्टर्स के सामने भी सेक्शुअल एक्टिविटी (Sexual Activity) करने के लिए उन पर दवाब बनाया जाता था. आपको बता दें कि डॉक्टर मनी इसे रिसर्च का हिस्सा बताते थे.

दोनों बच्चे बन गए डिप्रेशन के शिकार

ब्रूस और उनके भाई के साथ जो कुछ भी हुआ, उसके बाद वह डिप्रेशन (Depression) में चले गए. आपको बता दें कि जब ब्रूस ने कई बार सुसाइड (Suicide) की कोशिश की, तब उन पर हो रहे एक्सपेरिमेंट को बंद किया गया. जानकारी के मुताबिक जब ब्रूस को पता चला कि वो असल में लड़की नहीं, लड़का है तो वह लड़का बने रहना चाहते थे. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ब्रूस को बचपन ऐसे इंजेक्शन्स (Injections) दिए जाते थे, जिनसे उनके स्तन विकसित (Breast development) हों लेकिन जब उन्हें सच पता चला तो उन्होंने 15 साल की उम्र में अपना नाम बदल कर डेविड रख लिया और 21 साल की उम्र में ब्रेस्ट रिमूव (Breast Removal) कराने के लिए सर्जरी कराई और मेल हार्मोन टेस्टोस्टेरोन (Male hormone testosterone) के इंजेक्शन लेने लगे. साथ ही अपने प्राइवेट पार्ट को ठीक कराने के लिए सर्जरी भी कराई.

तलाक की बात सुन कर ली आत्महत्या

आपको बता दें कि डेविड ने 1990 में एक महिला से शादी की और उनके तीन बच्चों को भी अपनाया लेकिन साल 2004 में जब उनकी पत्नी ने उनसे डाइवोर्स (Divorce) लेने की बात की तो उसके 2 दिन बाद 4 मई 2004 को उन्होंने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली. आपको यह भी बता दें कि उनके भाई भी डिप्रेशन के शिकार थे, जिनकी मौत जुलाई, 2002 में एंटी- डिप्रेजेंट के ओवरडोज (Over dose of anti-depressants) की वजह से हुई थी.



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