FILM REVIEW: स्पेशल इफेक्ट्स और एक्शन से भरपूर है ‘Godzilla vs Kong’

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हॉलीवुड में मॉन्स्टर फिल्म्स का अपना एक इतिहास है और अपना एक क्रेज है. वैसे तो एक अनजान से दैत्याकार जानवर को लेकर कई फिल्में बनी हैं, जैसे जॉस, जुरैसिक पार्क, द होस्ट या फिर एनीमेशन फिल्म जैसे मॉन्स्टर यूनिवर्सिटी या मॉन्स्टर आयएनसी. इन सबके बावजूद एक फिल्म फ्रैंचाइजी ऐसी है जिसमें दो तरह के मॉन्स्टर्स को लेकर फिल्में बनाई गईं और फिर एक समय ऐसा आया कि दोनों मॉन्स्टर्स की आपस में युद्ध की फिल्मों की सीरीज बनी. ‘गॉडजिला वर्सेस कॉन्ग (Godzilla vs Kong)’ इसी कड़ी की चौथी फिल्म है, जो हाल ही में अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज की गई. फिल्म अद्भुत है. अगर आप मॉन्स्टर फिल्म्स का शौक रखते हैं तो इसे जरूर देखिये.

गॉडजिला एक जापानीज फ्रैंचाइज है जिसमें 1954 से अब तक 36 फिल्में बनाई जा चुकी हैं. जापान की सुप्रसिद्ध फिल्म और थिएटर प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी “टोहो” ने सबसे पहले गॉडजिला बनायी थी. जमीन और पानी में रहने वाले इस मॉन्स्टर का स्वरूप डायनासोर के एक प्रकार ‘स्टेगोसौरस” जैसा है. जापान में मॉन्स्टर को कायजो कहा जाता है और गॉडजिला की अधिकांश फिल्मों में उस समय के जापान के सामाजिक और राजनैतिक परिवेश का ज़िक्र होता है और कभी कभी माइथोलॉजी का उद्धरण भी किया जाता रहा है. 36 गॉडजिला फिल्मों में से पहली 32 फिल्में टोहो, 1 फिल्म ट्राय-स्टार पिक्चर्स और 3 लीजेंडरी पिक्चर्स ने बनायीं हैं. वहीं किंग कॉन्ग फ्रैंचाइज़ अमेरिकन हैं और 1933 से चली आ रही है. इसे अब तक टोहो, पैरामाउंट, यूनिवर्सल और वार्नर ब्रदर्स स्टूडियो बना चुके हैं. कुल जमा 12 फिल्में इस श्रृंखला में बनायीं जा चुकी हैं और तकरीबन सभी की सभी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही हैं. किंग कॉन्ग की सफलता से प्रेरित हो कर ही टोहो ने गॉडजिला सीरीज की शुरुआत की थी.

फिल्म की कहानी में एपेक्स साइबरनेटिक्स नाम की कंपनी एक मैकेनिकल गॉडजिला बना लेती है जिसे दिमाग से नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन इसे चलाने के लिए जो ऊर्जा चाहिए वो प्राप्त करने के लिए किंग कॉन्ग का इस्तेमाल कर के को पृथ्वी के अन्तर्भाग यानि “हॉलो अर्थ” में जाना पड़ेगा. ऐसा विश्वास है कि सभी मॉन्स्टर इसी “हॉलो अर्थ” से निकले हैं और उनकी ऊर्जा वहीं से आती है. मैकेनिकल गॉडजिला की वजह से असली गॉडजिला एपेक्स के मुख्यालय पर हमला कर के उसे तहस नहस कर देता है. एपेक्स का मालिक चतुराई से किंग कॉन्ग को “हॉलो अर्थ” भेजने के लिए विशेषज्ञ वैज्ञानिक नैथन लिंड (एलेग्जेंडर स्कारसगार्ड), कॉन्ग स्पेशलिस्ट इलीन एंड्रूज़ और उसकी गोद ले हुई बेटी जिया को अपने दल में शामिल कर लेते हैं. जिया, माओरी जाति के इवी कबीले की आखिरी संतान है और मूक बधिर होने की वजह से वो कॉन्ग से सांकेतिक भाषा में बात करती है और कॉन्ग उसकी बात मानता भी है.

हॉलो अर्थ खोजने की प्रक्रिया में किंग कॉन्ग और गॉडजिला का आमना सामना होता है और युद्ध में गॉडजिला कॉन्ग की धुलाई कर देता है. तभी मैकेनिकल गॉडजिला आ कर असली गॉडजिला को ख़त्म करना चाहता है. घायल पड़ा हुआ कोंग, होलो अर्थ से लायी एनर्जी से मैकेनिकल गॉडजिला को ख़त्म कर देता है. असली गॉडजिला को कॉन्ग की मदद से जीत मिलती है तो वो कॉन्ग से लड़ाई नहीं करता और वहां से चला जाता हैं.

ट्रांसफॉर्मर्स, वर्ल्ड वॉर ज़ी, द ममी जैसी बड़े बजट की फिल्मों के सिनेमेटोग्राफर रहे बेन सेरेसिन ने इस स्काय-फ़ाय फिल्म को शूट किया है. वैसे तो ये फिल्म बड़े परदे पर देखने के लिए बनी है लेकिन ओटीटी पर भी इसके स्केल का अंदाजा लगाया जा सकता है. बेन का काम फिल्म की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस तरह की फिल्म में एडिटिंग के ज़रिये मानव किरदारों और मॉन्स्टर्स के बीच रोल की लम्बाई का तालमेल बिठाया जाता है. ऐसा नहीं लगना चाहिए कि ये सिर्फ मॉन्स्टर्स पर बनी फिल्म है और न ही ऐसा लगना चाहिए कि मॉन्स्टर्स का काम बहुत कम है. एडिटर जोश शफर ने पैसिफिक रिम और कई अन्य बहु चर्चित फिल्मों में कहानी की रफ़्तार और संतुलन को अपनी एडिटिंग कला से रोचक बनाये रखा है और इस फिल्म में भी रोमांच पूरे समय बना रहता है. फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक टॉम टॉम होल्कनबर्ग उर्फ़ जंकी एक्सेल ने दिया है जो अद्भुत है. इसका साउंडट्रैक इतना अच्छा है कि फिल्म से हट कर भी सुना जा सकता है.

स्काय-फ़ाय फिल्मों की आत्मा उसके स्पेशल विजुअल इफेक्ट्स में बसती है और गॉडजिला वर्सेस कॉन्ग के विजुअल इफ़ेक्ट सुपरवाइजर हैं जॉन देस्जारदीन यानी डीजी जो हॉलीवुड की कई बड़ी फिल्में जैसे मिशन इम्पॉसिबल, मैट्रिक्स सीरीज, एक्स-मेन सीरीज के विजुअल इफ़ेक्ट सुपरवाइजर रह चुके हैं. इस फिल्म में उन्होंने अपनी सभी फिल्मों के इफेक्ट्स को पीछे छोड़ दिया है. कॉन्ग के चेहरे पर आने वाले भाव हों या उसका गॉडजिला से युद्ध, दोनों में ही दृश्य इतने खूबसूरत हैं कि आप मॉन्स्टर के द्वारा किये जा रहे विनाश को छोड़ कर उनसे सहानुभूति कर बैठते हैं. डीजे फ़िलहाल स्टार वार्स सीरीज की पहली फिल्म को 4 डी में कन्वर्ट करने जा रहे हैं. ये फिल्म उनके शानदार करियर में एक और इज़ाफ़ा है.

गॉडजिला वर्सेस कॉन्ग एक बहुत ही भव्य, बहुत बड़ी और बहुत ही सलीके से बनी हुई फिल्म हैं. चूंकि भारत में इस तरह की मॉन्स्टर फिल्म्स नहीं बनती हैं तो इसे देख कर सीखा जा सकता है. लेकिन ये फिल्म सिर्फ मॉन्स्टर फिल्म होने के नाते नहीं देखी जाए और अच्छी स्क्रिप्ट, अच्छे बैकग्राउंड म्यूजिक, बढ़िया विजुअल इफ़ेक्ट और लाजवाब एक्शन की बारीकियां सीखने के लिए इस फिल्म में बहुत कुछ है. ज़रूर देखिये अगर आप मॉन्स्टर फिल्म्स देखने के शौक़ीन हैं.

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