FILM REVIEW ‘द टुमॉरो वॉर’: बेसिर-पैर की स्क्रिप्ट वाली फिल्में हॉलीवुड में भी बनती हैं

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एलियंस यानी दूसरे ग्रहों से आये प्राणियों पर बनी सभी फिल्में लाइब्रेरी से निकाल लीजिये. मसलन एलियंस, इंडिपेंडेंस डे या एलियंस विरुद्ध प्रिडेटर. इसमें मिलाइये थोड़ा ‘जुरैसिक पार्क’ और ‘ट्रेमर्स’ नाम की फिल्मों को. ऊपर से स्वाद के लिए ‘वॉर ऑफ़ द वर्ल्डस’, ‘आई एम लीजेंड’ या ‘एज ऑफ़ टुमारो’ डालिये. हिलाइये मत, सब एक साथ दाल के पतीले को वैसे ही छोड़ दीजिये. थोड़ी देर बाद जैसा भी पका हो, वो फिल्म परोस दीजिये- ‘द टुमॉरो वॉर’ हाज़िर है.

अमेरिकी फिल्मों में हमेशा फिल्म का हीरो दुनिया को ख़त्म होने से बचाने के लिए निकल पड़ता है. वो अकेला होता है. कोई साथी नहीं होता. कभी कभी अप्रत्याशित मदद मिल जाती है, लेकिन उसके सामने तो दुश्मन एलियन होता है, इसलिए उसे सर्व-शक्तिमान दिखाया जाता है. ऐसा लगता है कि दुनियाभर की सारी मुसीबतें अमेरिका पर ही आती हैं, दुश्मन देश हों या दुश्मन गृह, पुरानी सभ्यता से आये लोग हों या एलियंस, सबके सब अमेरिका को ख़त्म करने के लिए जन्मे हैं. इसी वजह से उनके किसी आम नागरिक को उठकर प्रतिकार करना होता है और हथियार उठाने पड़ते हैं. अमेजन प्राइम पर रिलीज़ नयी फिल्म ‘द टुमॉरो वॉर’ में एक नए पैसे की नवीनता नहीं है. कई फिल्मों को एक साथ फेंट कर एक स्क्रिप्ट बना दी गयी है.

पिछले कुछ दिनों में हॉलीवुड में और अब भारत में भी एकाध ऐसे ऐप आये हैं, जहां स्क्रिप्ट लिखने वालों को कहानियां मिल जाती हैं, कहानी से जुड़ी रिसर्च मिल जाती है, स्क्रिप्ट में क्या क्या मसाला डाला जा सकता है वो जानकारी मिल जाती है. स्क्रिप्ट राइटिंग के जो सॉफ्टवेयर हैं उसमें स्क्रिप्ट एनालिसिस की भी सुविधा होती है. इन सॉफ्टवेयर में पता चल जाता है कि किस किरदार को कितने सीन मिले हैं, कितने डायलॉग मिले हैं. शूटिंग के लिए कितने सीन भीतर शूट होंगे, कितने बाहर होंगे. क्या किसी कैरेक्टर की वजह से स्क्रिप्ट ज़्यादा भारी हो रही है, क्या हीरो को कम सीन मिले हैं. इस तरह की जानकारी मिलने से स्क्रिप्ट राइटर के पास असलहा जमा हो जाता है स्क्रिप्ट में परिवर्तन करने का. अब डर ये है कि ऐसा सॉफ्टवेयर न बन जाये कि फिल्म का जॉनर तय किया जाए, दो चार लाइन की मूल कहानी लिखी जाये और फिर सॉफ्टवेयर बाकी पूरी स्क्रिप्ट बना देगा. कम से कम द टुमॉरो वॉर में ऐसा ही लगा है.

एकदम टिपिकल एलियन से लड़ाई की कहानी है. एलियन भविष्य में पृथ्वी को ख़त्म कर देंगे ऐसा पता चलता है तो वर्तमान समय के कुछ जांबाज़ लड़ाकों को भविष्य की लड़ाई लड़ने के लिए भेजा जाता है. कुछ समय लड़ाई में भाग लेकर और अपने साथियों को मरते देख कर नायक एलियन को मारने के फॉर्मूले के साथ वर्तमान में लौट आता है और फिर वो इस फॉर्मूले की मदद से इन एलियंस को वर्तमान में ही मार के भविष्य में होने वाले सर्व-विनाशक युद्ध को होने से रोक लेता है. ऐसी स्क्रिप्ट लिखने के लिए ज़ैक डीन को क्या कहना चाहिए? इनोवेशन के नाम पर शून्य है ये स्क्रिप्ट. एक भी सीन ऐसा नहीं है जिसको देख कर इस फिल्म को याद रखा जाएगा. स्टीवन स्पेबर्ग की ईटी – द एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल का जादू वाला एलियन हो या इंडिपेंडेंस डे के खूंखार एलियंस, हर बार दर्शकों के लिए कुछ नया था. एलियन पर बनी एक फिल्म एलियंस में एलियन दिखते ही इतने घिनौने थे कि उनसे नफरत हो जाती थी. द टुमॉरो वॉर के एलियंस को देख कर हंसी आती है.

फिल्म के मुख्य अभिनेता हैं क्रिस प्रैट जो कि कई वर्षों से टेलीविज़न और फिल्मों में काफी सक्रिय रहे हैं लेकिन उन्हें जब तक मार्वल सिनेमेटिक यूनिवर्स में स्टार-लॉर्ड की भूमिका नहीं मिली थी, वो वर्ल्ड फेमस नहीं हो पाए थे. क्रिस एक अच्छे अभिनेता हैं खास कर के इस तरह की एक्शन फिल्मों के लिए. वो पूरा समय स्क्रीन पर छाये रहे, उनके चेहरे पर एक मासूमियत है जो लड़कियों को बहुत पसंद आती है. हिंदुस्तान में भी क्रिस प्रैट के काफी फैंस हैं. विचित्र बात ये है कि फिल्म के प्रमोशन के लिए क्रिस को एक इंटरव्यू करना पड़ा था वो भी वरुण धवन के साथ जिसमें क्रिस, “चलती है क्या 9 से 12″ गाने की स्टेप्स करते हुए नाच भी रहे थे”.

इस स्क्रिप्ट में भावनात्मक अभिनय के लिए कुछ खास गुंजाईश थी नहीं. फिल्म में क्रिस अपनी बेटी म्यूरी (येवोन स्ट्राहोवस्की) से भविष्य में मिलते हैं. येवोन को हमने पिछले कुछ सालों में कई फिल्मों और वेब सीरीज में देखा है. इस फिल्म में क्रिस के बाद सबसे बड़ा रोल उनका है और इसके बावजूद इस रोल में उनके करने के लिए कुछ खास था नहीं. एक्शन भी थोड़ा ही कर पायीं और एकाध जगह पिता से इमोशनल संवाद की गुंजाईश बनी थी. एलियंस के ग्राफ़िक्स पर बहुत मेहनत की गयी लगती है. शुरू में उन्हें मारने के लिए गले और पेट में गोलियां चलाना सिखाया जाता है लेकिन फिल्म के क्लाइमेक्स में हीरो अपने हाथों से, मुक्के से, कुल्हाड़ी से और एलियन के नाखून से भी एलियन को ज़ख़्मी कर देता है. निर्देशक का लॉजिक वो ही जानें.

अगर आप एलियन वॉर की फिल्में देखने के शौक़ीन हैं तो ये फिल्म आपको बहुत पसंद आये ऐसा तो नहीं होगा, लेकिन बुरी भी नहीं लगेगी. ये एक अच्छी टाइम पास किस्म की फिल्म है, जहां अमेरिका इस बार एलियंस की वजह से खतरे में हैं.



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