True Movie Review: स्क्रिप्ट और अभिनय ने नहीं किया इंसाफ, पर कहानी के लिए फिल्म देखनी चाहिए

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मुंबई. फिल्म ‘ट्रू’ (True) में मुख्य अभिनेता हरीश विनय (Harish Vinay) बहुत ही कच्चे कलाकार हैं. कोई भी भाव उनके चेहरे पर ज़्यादा देर टिक नहीं पाता और इस वजह से दर्शक इंटेंसिटी महसूस नहीं करते. हमेशा क्रोधित होने का असफल प्रयास करते हैं. कभी कभी टिपिकल फिल्मी हीरो की तरह बाइक चलाते हैं, दुश्मनों का पीछा करते हैं, हवा में छलांग लगा कर गोलियों से बचते हैं, लेकिन ये सब बातें फिल्म की कहानी में उनका साथ नहीं देती. एक इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट से इस तरह की कलाबाजियों की उम्मीद नहीं होती. हरीश ने बहुत निराश किया है.

फिल्म की अभिनेत्री लावण्या के पास रोल तो ठीक था लेकिन वो भी हरीश की ही तरह कमजोर अभिनेत्री हैं. सरपंच मधुसूदन रेड्डी की भूमिका में मधुसूदन राव ने बाकी कलाकारों से बेहतर अभिनय किया है. कहानी उन्हीं की ज़िन्दगी और मौत से उपजे सवालों का जवाब ढूंढने पर आधारित है, लेकिन उनका किरदार अविश्वसनीय है. फिल्म में कुछ बातें थोड़ी अजीब लगती हैं क्योंकि अधिकांश फिल्म गांव में शूट हुई है और जिस तरह मेडिकल फैसिलिटी की बात दिखाई गयी है और जिस तरह के हॉस्पिटल या इलाज के दृश्य हैं, वो संभव ही नहीं हैं. हरीश और लावण्या के बीच प्रेम है लेकिन फिल्म में वे सिर्फ फ्लैशबैक में नजर आता है और इस पर थोड़ा यकीन करना मुश्किल होता है.

हरीश पर गांव के कुछ गुंडे दोनाली बंदूकों से जानलेवा हमला कर देते हैं. हरीश एक गुंडे को पकड़ भी लेते हैं तो गुंडे के साथी उसे मार देते हैं और देखते ही देखते लाश गायब कर देते हैं. गुंडों के टैटू दिखाए जाते हैं तो ऐसा लगता है कि अब कोई क्लू मिलेगा, लेकिन ऐसा होता नहीं. मधुसूदन का किरदार अपने पुत्र के साथ जिस तरह का व्यव्हार करता है वो पहले किसी फिल्म में देखने को नहीं मिला है. ये कहानी का सबसे सशक्त हिस्सा था लेकिन इसे बहुत ही कमजोर ढंग से फिल्माया गया है. फिल्म का बजट शायद कम रहा होगा इस वजह से कई सीन काफी अजीब से शूट किए गए हैं.

डिजिटल कैमरा आने के बाद शूटिंग आसान हो गई है, लेकिन डिजिटल कैमरा का सही इस्तेमाल किया जाए ये भी जरूरी है. सिनेमेटोग्राफर सिवा रेड्डी की ये पहली फिल्म है और उन्हें अभी काम सीखने की जरूरत है और यही बात एडिटर जानकीरमन राव पमराजु के बारे में भी कही जा सकती है. इस कहानी में एक नयापन है, लेकिन स्क्रिप्ट और अभिनय ने इस कहानी के साथ इन्साफ नहीं किया है. फिल्म देखी जानी चाहिए कहानी के लिए.



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